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सफलता का मंत्र है यह योग karma yoga

जिसका सार है कर्म किए जा फल की इच्छा मत क। इसे कर्म योग  कहा जाता है जिसे गीता मे सर्वश्रेष्ठ माना गया है। गीता के अनुसार किसी भी इंसान की सफल ज़िंदगी के लिए कर्मयोग का होना सबसे ज्यादा महतव्पुर्ण है।

लेकिन जब जब हमे सुनने को मिलता है की ‘’कर्म किए जा फल की चिंता मत कर’’ तो कभी कभी यह काफी अजीब लगता है की कोई काम हम बिना फल की चिंता के कैसे कर सकते है? आखिर हम कोई संत या सन्यासी तो है नहीं। लेकिन यह इस श्लोक (karma yoga) को गलत ढंग से समझना हुआ। दरअसल यह तो हमे सिर्फ सलाह देता है की आप बस अपना काम करें। उस काम का क्या नतीजा होगा उस पर ज्यादा ध्यान न दे। यह हमे अपने अपने आज मे जीने को कहता है। आज मे जीना ही पल मे जीना है। पल मे जीने के मायने है, आप जहां हो , जिस हाल मे हो उसे भरपूर जियो। उस पल का पूरा मजा लो। इसका मतलब हुआ की आप अपना जो भी काम कर रहे है उसमे पूरी तरह डूब जाओ। उसमे डूबने के मायने है की आप उस पल अपना 100 % दे रहे है। मजेदार बात यह है की आप काम हमेशा अपने आज मे कर रहे होते है लेकिन आपका दिमाग और मन हमेशा भविष्य मे होता है। सुबह से लेकर शाम तक काम करने के बाद भी मन को संतुष्टि नहीं मिलती क्योकि जो हमने किया है या जो हमारे पास है हम उसका सुख नहीं ले पाते और उस काम के नतीजे(result) यानि के भविष्य की चिंता मे डूब जाते है। ऐसा नहीं है की हम जानते नहीं है

Courtesy:whatsknowledge

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