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किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है व्यायाम

किडनी का बेहतर तरीके से काम करना शरीर के लिए जरूरी है। इसके क्रिया- कलाप में थोड़ी-सी भी बाधा मृत्यु का कारण बन सकती है। यौगिक जीवन शैली तथा आहार को संतुलित एवं सात्विक बनाकर किडनी को हमेशा स्वस्थ रखा जा सकता है।

आसन
जिन्हें किडनी से संबंधित किसी भी प्रकार की बीमारी है, वे योग्य मार्गदर्शन में सूक्ष्म यौगिक व्यायाम का अभ्यास प्रतिदिन करें। किन्तु अन्य लोग जो अपनी किडनी तथा अन्य अंगों को स्वस्थ तथा सशक्त बनाना चाहते हैं, उन्हें निम्न आसनों का अभ्यास प्रतिदिन करना चाहिए- ताड़ासन, पाद हस्तासन, हस्त उत्तानासन, जानु शिरासन, नौकासन, भुजंगासन, अर्धतत्स्येन्द्रासन, त्रिकोनासन आदि।

जानु शिरासन की अभ्यास विधि
दोनों पैरों को सामने की ओर रखकर बैठ जाएं। इसे दण्डासन कहते हैं। दो-तीन लम्बी तथा गहरी श्वास-प्रश्वास लें। इसके बाद बाएं पैर को घुटने से मोड़कर इसकी एड़ी को जनने्द्रिरय के नीचे तथा तलवे को दाएं पैर की जांघ से सटाकर रखें। अब एक सामान्य श्वास लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाएं तथा श्वास बाहर निकालते हुए आगे की ओर इस प्रकार झुकें कि हथेलियों से दाएं पैर का पंजा पकड़ में आ जाए और माथा घुटने को स्पर्श करे। इस अवस्था में श्वास-प्रश्वास को सामान्य रखते हुए आरामदायक अवधि तक रुकें। इसके बाद श्वास अंदर लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाएं तथा श्वास बाहर निकालते हुए वापस पूर्व स्थिति में आ जाएं। यही क्रिया दूसरे पैर से भी करें।

सावधानी
स्लिप डिस्क, सायटिका या रीढ़ संबंधी किसी भी समस्या से ग्रस्त लोग इसका अभ्यास न कर पीछे झुकने वाले आसनों का अभ्यास करें।

आसन
आगे झुकने वाले आसन के अभ्यास के बाद पीछे झुकने वाले किसी भी आसन जैसे उष्ट्रासन, सुप्त वज्रासन आदि का अभ्यास करें। इसके अतिरिक्त तितली आसन एवं गोरक्ष आसन का अभ्यास किडनी के स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहता है।

प्राणायाम
किडनी को पूर्णतया स्वस्थ रखने के लिए नाड़ी शोध, उज्जायी, चन्द्रभेदी प्राणायाम, भ्रामरी तथा ओम प्राणायाम आदि का अभ्यास कारगर साबित होता है। उच्च रक्तचाप आदि की शिकायत न हो तो सरल कपालभाति, अग्निसार तथा उड्डियान बंध आदि का अभ्यास भी किडनी तथा अन्य उदर अंगों को स्वस्थ रखने के लिए उपयोगी है।

उज्जायी प्राणायाम की अभ्यास विधि
ध्यान के किसी आसन जैसे पद्मासन, सिद्धासन या सुखासन में बैठकर रीढ़, गले व सिर को सीधा कर लें। दो-तीन लम्बी तथा गहरी श्वास-प्रश्वास लें। इसके बाद श्वास नलिका को मानसिक रूप से थोड़ा संकुचित कर नासिका से एक गहरी लम्बी तथा धीमी श्वास इस प्रकार लें कि गले से प्रेशर कुकर की सीटी के समान ध्वनि निकले। इसके बाद लम्बी गहरी धीमी श्वास नासिका द्वारा ही बाहर निकालें। यह उज्जायी प्राणायाम की एक आवृत्ति है। प्रारम्भ में इसकी 10 से 12 आवृत्तियों का अभ्यास करें। धीरे-धीरे आवृत्तियों की संख्या अपनी क्षमतानुसार बढ़ा सकते हैं।

ध्यान एवं शिथिलीकरण
योग निद्रा, ध्यान एवं शिथिलीकरण के अभ्यास से तनाव आदि से छुटकारा मिल सकता है।

आहार
शुद्ध, सात्विक तथा प्राकृतिक आहार किडनी ही नहीं, पूरे शरीर के लिए हितकारी होता है। तला, भुना, मसालेदार खाना, धूम्रपान तथा मद्यपान स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदेह होते हैं। किडनी को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार लें। प्रोटीनयुक्त आहार (दूध, चीज, अंडे) संतुलित मात्रा में लें। चीनी, फैट तथा प्रसंस्कृत आहार कभी-कभार लें।

Courtesy:livehindustan

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